*BREAKING:*भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1985 बैच के अधिकारी श्री शैलेष कुमार राजभाषा(सचिव) बने। *एसोसिएशन ने 14 मई को राजभाषा सचिव से मुलाक़ात कर, सर्वोच्च न्यायालय में डीओपीटी के लंबित मामले में कोई फैसला आने तक पात्र वरिष्ठ अनुवादकों को सहायक निदेशक के तौर पर तदर्थ पदोन्नति देने की मांग की; सचिव महोदय ने शीघ्रता से कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। *सहायक निदेशक के तौर पर पदोन्नति के मामले में 25 अप्रैल,2018 को कैट ने सुनवाई की अगली तारीख़ 25 मई,2018 तय की। *सहायक निदेशकों को रिवर्ट किए जाने के खिलाफ दायर मामले में कैट,दिल्ली ने 22 मार्च,2018 को सुनवाई करते हुए स्थगन आदेश जारी किया। *रिवर्ट किए गए सहायक निदेशकों से रिफंड लेने का नियम नहीं। *एसोसिएशन ने डीपीसी नियमित रूप से कराने की मांग की।

Tuesday, 20 March 2018

पिछली सेवा के लिए रिफंड लेने का नियम नहीं

साथियो,

राजभाषा विभाग के दिनांक 14 मार्च,2018 के पत्र के तहत जिन सहायक निदेशकों को नियमित किए जाने से पूर्व की अवधि के लिए प्रत्यावर्तित किया गया है, उनके संबंध में उक्त अवधि के लिए रिफंड की आशंका व्यक्त की जा रही है। किंतु इस संबंध में डीओपीटी के दिनांक 2 मार्च, 2016 के संलग्न कार्यालय ज्ञापन (विशेषकर बिंदु संख्या-IV) से स्पष्ट है कि यह नियम-सम्मत नहीं है। आशा है,इस ज्ञापन से यह आशंका निर्मूल हो जाएगी और सभी साथी अधिक आश्वस्त होकर निर्णय ले सकेंगे।

फिर भी,यदि किसी साथी को इस विषय में किसी अन्य संगत आदेश की जानकारी हो तो निवेदन है कि कृपया उसे एसोसिएशन से साझा करने का कष्ट करें।



Friday, 16 March 2018

तदर्थ सहायक निदेशकों के रिवर्सन के विरुद्ध कार्रवाई तेज़

साथियो, 

आप अवगत ही हैं कि 14 मार्च के एक आदेश के माध्यम से राजभाषा विभाग ने संवर्ग के 158 सहायक निदेशकों को रिवर्ट किया है। एसोसिएशन इस आदेश को लेकर चिंतित है क्योंकि यह खेदजनक और मनोबल को तोड़ने वाला है। संभवतः, अधिकतर सदस्य आदेश की इस पृष्ठभूमि से परिचित हैं कि यह प्रकरण आवश्यक मंज़ूरी लिए बगैर तदर्थता अवधि बढाने से संबंधित है। श्रीमती रंजना माहेश्वरी (नागपुर स्थित कार्यालय में सहायक निदेशक) को उनके कार्यालय ने सेवानिवृत्ति से कुछ ही समय पहले यह कहते हुए रिवर्ट कर दिया था कि एक वर्ष बाद इस पद पर उनकी तदर्थता बनाए रखने के लिए मंज़ूरी नहीं ली गई है। श्रीमती माहेश्वरी से रिफंड लेने की प्रक्रिया भी शुरु कर दी गई। इसे देखते हुए श्रीमती माहेश्वरी इस दलील के साथ न्यायालय गईं थीं कि उनसे कनिष्ठ अधिकारी अभी भी सहायक निदेशक के तौर पर किस प्रकार तैनात हैं जबकि उनकी भी तदर्थता अवधि नहीं बढाई गई है। मामले पर राजभाषा विभाग की राय मांगी गई तो विभाग ने सभी सहायक निदेशकों (पूर्व में नियमित हो चुके सहायक निदेशकों सहित) की तदर्थता अवधि को बढ़ाने के लिए फाइल डीओपीटी भेजी किंतु डीओपीटी ने इस पर नकारात्मक रुख अपनाया। एसोसिएशन के लगातार दबाव बनाए रखने को देखते हुए, डीओपीटी के मना करने के बावजूद, राजभाषा विभाग ने यह मामला माननीय गृहमंत्री के पास भेजा जहां से यह प्रस्ताव पुनः डीओपीटी को विचारार्थ भेजा जाना था। किंतु माननीय गृह मंत्री ने भी सहमति प्रदान नहीं की। इसलिए, श्रीमती रंजना माहेश्वरी के मामले में कोर्ट में अपना पक्ष (नकारात्मक) रखने के लिए यह पृष्ठभूमि तैयार की गई है/आदेश जारी किया गया है।

एसोसिएशन सभी तदर्थ सहायक निदेशकों के हितों की रक्षा के लिए वचनबद्ध है। इसलिए, इस मामले को कोर्ट में ले जाने  की पूरी तैयारी है ताकि स्थगन लिया जा सके।  कल ही सहायक निदेशक श्री डी.पी. मिश्रा जी ने भी व्यक्तिगत क्षमता में, वकील के माध्यम से विभाग को एक नोटिस भिजवाया है। इस मुद्दे पर संवर्ग के साथियों को एकजुट रहने की आवश्यकता है।

Tuesday, 17 October 2017

लंबित दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराएं

साथियो,

वर्ष 2016-17 की रिक्तियों में पदोन्नति के लिए निम्नांकित मित्रों के अपेक्षित दस्तावेज़ राजभाषा विभाग को मिलने शेष हैं-

1. नरोत्तम सिंह रावत
2. मोहिन्दर पाल
3. कविता रावत
4. राजाराम शुक्ल
5. सुजाता मट्टू
6. प्रदीप कुमार शर्मा
7. सुधा वर्मा
8. तरुण कुमार
9. मीना बक्शी
10. जनक अरोड़ा
11. सीमा थपलियाल
12. रेखा बधावन
13. अमरकांत सिंह
14. भारती पुंजा शर्मा
15. राजबीर सिंह
16. अनिता कुमारी
17. रामजन्म चौधरी

एसोसिएशन के साथियों ने लगभग उपरोक्त सभी को व्यक्तिगत रुप से भी सूचित कर दिया है। सभी संबंधितों से अनुरोध है कि वे कृपया प्राथमिकतापूर्वक अपने दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराने का कष्ट करें ताकि आगे की कार्रवाई हो सके।






Tuesday, 30 May 2017

कैट के आदेश पर तुरन्त अमल की मांग

मित्रो, 
कैट के दिनांक 22 मई, 2017 के आदेश को देखते हुए,एसोसिएशन ने कल सचिव (राजभाषा) से मुलाक़ात कर इस आदेश को तत्काल लागू करने की मांग की। सचिव महोदय से आग्रह किया गया कि 81 वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के आदेश को शीघ्रता से लागू करने से ही,जुलाई में सेवानिवृत्त हो रहे श्री राजा राम शुक्लाजी के मामले में भी न्याय हो सकेगा और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा। सचिव महोदय का ऐसे मामलों की ओर ख़ास तौर से ध्यानाकर्षण किया गया जिनमें विभागीय लापरवाही के कारण सहकर्मियों को समय रहते पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका और उन्हें आजीवन आर्थिक नुक़सान हुआ। इसे ध्यान में रखते हुए सचिव महोदय ने मामले को व्यक्तिगत रूचि लेते हुए देखने का आश्वासन दिया और अवर सचिव श्री देवगनजी को पदोन्नति आदेश शीघ्रता से निकालने का आदेश दिया।